माफ़ करना सच्चाई सामने है, माफ़ करना कि सच्चाई सचमुच सामने है ! यह अलग बात है कि देखने नहीं उसे हम याकी बांध दी है किसी ने पट्टिय…
और पढ़ेंअब से कुछ ही देर में... अब से कुछ ही देर में बस कुछ ही देर में हो जाएगा एक विस्फोट चल जाएंगी कुछ गोलियां कुछ इस पार, कुछ उस पार से बारूद से …
और पढ़ेंमलाजखंड 1 सैकडों सालों से मेरे सीने में बेशुमार दौलत धरती के ठंडा होते जाने से मनुष्य के कपडे पहनने तक जिसे हम कहते हैं सभ्…
और पढ़ेंशहर कोई विकल्प नहीं छोड़ता है दूर से नज़र आती चकाचौंध रौशनी के पीछे वह छिपाए रहता है नाउम्मीदी का अँधेरा , कल तक जो भरते थे हमारे अनाज…
और पढ़ेंशब्द खामोश , जुबां खामोश , दिल खामोश. जहां खामोश. शब्द पत्थर , जुबां पत्थर. दिल पत्थर , जहां पत्थर. शब्द जालिम , जुबां जालिम. दिल जाल…
और पढ़ेंदेना होगा तुम्हें हर सांस का हिसाब किस दिन किस नथुने से ली और किससे छोड़ी बाहर. इससे कोई मतलब नहीं कि कितनी ऑक्सीजन थी तुम्हारे हिस्से में…
और पढ़ेंदूर गांव में तब भी-अब भी भूख की खबरें आती हैं नहीं खिलौने , नहीं बिछौने भूखे पेट सुलाती हैं दिन भर की मजदूरी नहीं समय पर मिलती है खाली बर्त…
और पढ़ेंहे धृतराष्ट्र क्या धृतराष्ट्र होना ही तुम्हारी नियति है। या कभी खोलोगे भी आंखें सच तो यही है राजन कि बेहद जरूरी है अब आंखों पर चढ़ी पट्टी…
और पढ़ेंभाई लोकेन्द्र सिंह को ट की दो मर्मस्पर्शी कविताएं बेचारे रिश्ते रिश्ते पेड़ होते हैं जहाँ पलते हैं ढ़ेरों आपसी संबंधों के घोंसले। पेड़ क…
और पढ़ें
Social Plugin