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Digital Divide : पहला दिन: स्कूल में एडमिशन

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हम सुबहसुबह जब राजपुर पहुंचे तो विमल जी और शेखर जी के परिवार अपने छोटे बच्चों के एडमिशन की चिंता से बावस्ता थे। फिलहाल दोनों बच्चे यानी सामू और ओस आंगनबाड़ी में जाते हैं।

माधुरी जी ने हमें बताया कि उन्होंने आस पडोस के जरिये कुछ अफवाहें सुनी हैं। वे बोलीं- मैंने सुना तो मेरा तो बीपी बढ़ गया। आजकल बड़े शहरों में तो स्कूल में एडमिशन की दिक्कतें हैं ही, अब अपने जिले में भी यह दिक्कत होने लगी है। एकदो ही अच्छे स्कूल हैं। एक बार बच्चे को डाल दें तो 12 साल के लिए फुरसत हो। लेकिन बता रहे हैं कि पांच साल से ज्यादा उम्र के बच्चे को अब स्कूल में पहली कक्षा में एडमिशन नहीं दिया जाएगा। तो अपने सामू को इसी साल एडमिशन कराना होगा।

जब हमने पूछा कि यह जानकारी उन्हें कहां से मिली।

तो बोलीं कि उन्होंने सुना था किसी से।

"कल शाम को बगीचे में बात कर रहे थे। फिर मैंने सान्या से पूछा तो उसने बताया कि व्हाट्सएप पर भी ऐसा ही पोस्ट आया था। सान्या ने पढ़कर इसे सुनाया भी। उसमें लिखा था कि बच्चे का टेस्ट लिया जाएगा, उसके मातापिता से भी बात की जाएगी। संतुष्ट होने पर ही स्कूल एडमिशन लेगा।"

माधुरी जी ने बताया कि- "उन्होंने शेखर जी को बता दिया है। शेखर जी आज शाम को ही स्कूलों के फार्म ले आएंगे।"

इस पर हमने पूछा कि "क्या व्हाट्सएप पर और बातचीत में मिली सूचना की सत्यता उन्होंने पता की”, इस पर माधुरी जी ने इनकार में सिर हिलाया और सान्या भी चौंकी।

इतनी देर में देखा कि सामने विमल जी का बेटा तन्मय जा रहा था। हमने उसे आवाज देकर बुलाया। तन्मय से एडमिशन के बारे में बात की तो वह बोला कि- "अंकल ओस का भी एडमिशन कराना है, लेकिन हमने सभी स्कूलों की एडमिशन से संबंधित डेट का नोटिफिकेशन ले रखा है, जब भी फार्म ओपन होंगे तो मोबाइल पर नोटिफिकेशन जाएगा और फिर फार्म को आनलाइन ही भर देंगे।"

यह जानकारी माधुरी जी और उनके परिवार के लिए नई थी। उन्होंने पूछातो क्या आपको स्कूल जाने की जरूरत ही नहीं होगी।

तन्मय:होगी आंटी, लेकिन बार बार नहीं। जब फार्म भर देंगे और स्कूल की ओर से एडमिशन के लिए बुलाया जाएगा तो एक बार में जाकर ही सारे कागज भर देंगे और एडमिशन हो जाएगा। बार बार चक्कर लगाने से तो बच जाएंगे।

माधुरी:तो फिर ये व्हाट्सएप पर जो मैसेज आया है वह क्या है। क्या सचमुच पांच साल से ज्यादा उम्र के बच्चे के एडमिशन अब नहीं हुआ करेंगे।

तन्मय:नहीं आंटी, यह गलत है। व्हाट्सएप पर कोई भी सूचना आए तो उसे एक बार चैक जरूर करें। आजकल हर स्कूल की अपनी वेबसाइट है। नहीं तो फोन नंबर तो है ही। एक बार फोन करके संबंधित स्कूल से ही पूछ लेना चाहिए।

माधुरी:स्कूल वाले तो कुछ बताते नहीं।

तन्यम:तो फिर इस तरह का कोई अगर नियम बनेगा तो सरकारी साइट पर तो होगा ही। शिक्षा विभाग की सरकारी साइट पर भी इस बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है।

माधुरी:देख सान्या, क्या दिन भर वीडियो देखती रहती है। यह सारी जानकारी भी सरकारी साइट पर देख लिया कर। और तन्मय बेटा हमारे मोबाइल पर भी वह नोटिफिकेशन लगा दो ताकि स्कूल एडमिशन की तारीखों का पता चलता रहे।

 तन्मय फोन ले लेता है और नोटिफिकेशन सेट करते हुए सान्या को बाकी चीजें भी बताता है।

 इसके बाद जब हमने तन्मय से पूछा कि क्या मोबाइल पर विभिन्न नोटिफिकेशन लगाते हुए और सारा काम मोबाइल पर करते हुए वह साइबर सुरक्षा का भी ध्यान रखता है। तो उसने बताया कि हां, यह बहुत जरूरी है। आजकल हम कई साइट पर, खासतौर से सोशल मीडिया की साइट पर बहुत ज्यादा वक्त बिताते हैं। कई बार गैरजरूरी साइट पर भी जाते हैं, तो साइबर सुरक्षा का ख्याल रखना बहुत जरूरी है।

 तन्मय ने बताया कि वेब सर्चिंग करते हुए अपने पासवर्ड कहीं नहीं देने चाहिए। साथ ही कम से कम एप को अपने मोबाइल पर डाउनलोड करना चाहिए। जो जरूरी एप हैं उन्हें ही लोड करना चाहिए और एप को अपने कॉन्टेंक्ट, मैसेज, कैमरा आदि पर नियंत्रण नहीं देना चाहिए।

इस पर सान्या ने कहा कि लेकिन ज्यादातर एप तो अगर हम उन्हें यह सारी जानकारियां दें तो चलते ही नहीं हैं।

तन्मय: तब हमें एक बार डाउनलोड करने के बाद जो गैरजरूरी नियंत्रण लिया है, उसे बंद कर देना चाहिए। साथ ही लगातार अपने मोबाइल के परमिशन सेक्शन को देखते रहना चाहिए कि हमने किसी एप को गैरजरूरी नियंत्रण तो नहीं दे रखा है।

हमारी बातचीत के बीच में ही विमल जी गए। विमल जी ने चाय पीने के लिए बुलाया था। इन सभी को हम यहीं बातचीत में छोडकर विमल जी के पास पहुंचे। उनसे हमें खेती के बारे में कुछ जरूरी बातें करनी थी।

 शाम को जब शेखर जी घर आए तब पता चला कि एडमिशन फार्म तो मिलना अभी शुरू ही नहीं हुआ है। बाद में उन्हें माधुरी जी ने बताया कि उन्होंने विमल जी के बेटे तन्यम के जरिये इंटरनेट पर सारी प्रक्रिया समझ ली है। अब सारा एडमिशन का काम आनलाइन ही हो जाएगा और सिर्फ एक बार ही स्कूल जाना पड़ेगा। हालांकि इस बात से शेखर जी संतुष्ट नहीं थे। वे आनलाइन फ्राड की कई कहानियां जानते थे; उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर इतना भरोसा ठीक नहीं।

इस पर सान्या ने कहा कि पापा, आजकल इंटरनेट जरूरी है, और इससे खतरे की बात भी सही है। लेकिन खतरे की वजह से सुविधा का लाभ लेना तो वेबकूफी हुई न। जरूरत तो इस बात की है कि हम इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग करें।

 सान्या के मुंह से बड़ों जैसी बातें सुनकर राजमनोहर जी मुस्कुरा दिए और बोलेवाह बेटा क्या बात कही है। भई शेखर अब नई पीढ़ी पर भरोसा करना चाहिए। एक जमाने में हम लोगों अंग्रेजी शिक्षा का भी विरोध किया था, लेकिन अंग्रेजी भी जरूरी थी जैसे आज इंटरनेट जरूरी है।

इस बात पर सभी ने हामी भरी और सारा परिवार खाने की तैयारी में मशगूल हो गया।

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