किसी भी ग्रामीण जीवन की धुरी फसल होती है और फसल जब खेत से खलियान होते हुए घर आती है तो वह सबसे बड़ा उत्सव है। इसी उत्सव और खुशी के साक्षी बनने जब हम राजपुर पहुंचे तो ज्यादातर परिवार अपनी फसल को मंडी पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए सभी ने पहले से तैयारी कर रही थी। ट्रेक्टर ट्राली तैयार थे। दो, तीन और चार परिवारों ने मिलकर अपने अनाज को मंडी पहुंचाने की व्यवस्था कर रखी थी।
हम जब चौपाल पर पहुंचे तो सभी इस योजना को बनाने में व्यस्त थे कि दूसरे दिन सुबह सुबह जल्दी ट्रेक्टर निकाले जाएं ताकि मंडी समय पर पहुंचा जा सके। वरना तुलाई में समय ज्यादा लग जाता है और फिर समय पर वापसी मुमकिन नहीं होती है। कई लोगों को घरेलू सामान और सालाना कपड़े लत्ते भी खरीदने थे तो उनका कहना था कि पहली तुलाई में ही अपना नंबर आ जाए तो सौदा—सुथार के लिए वक्त मिल जाएगा।
शेखर जी और विमल जी भी इस बातचीत में शामिल थे। हमने शेखर जी पूछा कि क्या उन्होंने भावों की जानकारी ले ली है, तो उन्होंने बताया कि कल के अखबार में भाव आए थे तो उसी के आधार अनाज भरवा रहे हैं।
हमने विमल जी की ओर देखा।
विमल जी ने बताया कि आसपास की सभी मंडियों के भावों को अगर हम पहले से देख लें और कहां किस अनाज के लिए बेहतर दाम मिल रहा है, तो फिर आसानी होगी।
एक किसान ने कहा कि लेकिन आजकल तो ज्यादातर दाम पहले से ही सरकार तय कर देती है, तो कहीं भी जाकर बेचो कोई फर्क नहीं पड़ता।
विमल जी: फर्क पड़ता है। सरकार तय करती है, लेकिन व्यापारी आवक के मुताबिक भी दाम उपर नीचे होते हैं। अगर हम पिछली बार के दामों को इस बार से तुलना कर लें और अनाज को थोड़ा रोक लें तो ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।
शेखर जी: हां, ये तो बड़ी अच्छी बात है। लेकिन इसे क्यों न अभी कर लिया जाए। सभी अनाजों के लिए बेहतर मंडी भाव कहां मिल रहा है, उसकी सूची बना लेते हैं। उसी के आधार पर ट्रैक्टरों की दिशा तय कर लेंगे।
सभी इस बात पर सहमत हो गए थे।
इस बीच विमल जी ने बताया कि अब सभी मंडियों को ई—मंडी में तब्दील करने की तैयारी जोर शोर से चल रही है। तो आने वाले वक्त में तो इंटरनेट की भूमिका बड़ जाएगी।
शेखर जी: यानी अब खेती में फायदा उठाने के लिए ज्यादा से ज्यादा तकनीक के सहारे रहना होगा। इसमें तो गांव के कई लोग पिछड़ जाएंगे और जो लोग पहले से ही तकनीक में जानकारी रखते हैं, वे अधिक फायदे में रहेंगे।
विमल जी: नहीं यह पूरी तरह सही नहीं है। अगर हम चाहें तो जानकारी को साझा करके इस मुसीबत से बच सकते हैं। अपने गांव के सभी लोग पंचायत से यह जानकारी ले सकते हैं कि कौन सी मंडी में क्या भाव चल रहा है। साथ ही मंडी से अपना बैंक खाता जोड़कर सीधे बैंक में पैसा हासिल कर सकते हैं।
शेखर जी: विमल जी आप जैसे ही बैंक खाते और आनलाइन ट्रांजेक्शन की बात करते हैं तो हमारी तो धड़कनें बढ़ जाती हैं।
विमल जी: बढ़नी भी चाहिए। आनलाइन धोखाधड़ी का कारोबार अब डेढ़ ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का हो गया है। अपने रुपए में बात करें तो 105 लाख करोड़ रुपए के बराबर की धोखाधड़ी सालाना हो रही है।
शेखर जी: भाई ये लाख करोड़ हमें समझ में नहीं आते लेकिन इतना समझ आ रहा है कि बड़ी रकम है यह।
विमल जी: हां इतनी बड़ी रकम कि दक्षिण कोरिया और आस्ट्रेलिया की कुल जीडीपी इतनी है।
शेखर जी: यह तो बड़ी चिंता की बात है।
विमल जी: हां, चिंता की बात तो है। लेकिन अगर हम सुरक्षित इंटरनेट का इस्तेमाल करें तो इस चिंता से मुक्त हुआ जा सकता है। जैसे अपने घरों की सुरक्षा के लिए हम मजबूत ताले लगाने के साथ साथ अन्य उपाय करते हैं। वैसे ही इंटरनेट पर मजबूत पासवर्ड और दो—तीन स्तर की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही हर किसी अनजानी साइट पर नहीं आना जाना चाहिए। न ही अनजान लोगों को अपने घर परिवार अपनी आदतों आदि की ज्यादा जानकारी देनी चाहिए।
शेखर जी: लेकिन आजकल ये सोशल मीडिया पर तो लोग अनजान लोगों से खूब दोस्तियां कर रहे हैं। हमारी बिटिया की ही सोशल मीडिया प्रोफाइल पर ऐसे ऐसे लोग हैं, जिन्हें हम तो जानते ही नहीं और अपने जिले या राज्य के भी नहीं हैं वे।
विमल जी: बच्चे दोस्तियां करेंगे ही। सोशल मीडिया है ही दोस्ती करने का मंच। लेकिन हमारी जवाबदेही है कि हम बच्चों के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर नजर रखें। वे किससे बात कर रहे हैं और अधिक समय तो सोशल मीडिया पर नहीं गुजार रहे हैं। समय समय पर उन्हें इसके खतरे और सुरक्षा प्रणालियों की भी जानकारी देनी होगी।
शेखर जी: लेकिन यह जानकारी तो तभी देंगे जब हमें खुद होगी।
विमल जी: बिल्कुल, तभी तो मैं कहता हूं कि भविष्य को संवारना है तो इंटरनेट तकनीक को समझना ही होगा।
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