संपत्ति ·की लड़ाई पुरानी है, उस दौर में भी जब रत्नजडि़त सिंहासनों पर देव, गंधर्व, राक्षस विराजते थे और अब भी। सागर मंथन ·ही ·था से ·koई अनजान नहीं हैं। वही स्वरूप एक बार फिर एक अरब आबादी वाले देश ने देखा-सहा। सागर मंथन का स्वरूप जरूर थोड़ा परिवर्तित था। इसे सागर मंथन नहीं संसद मंथन कहा जाना चाहिए। इस बार दोनों तरफ सफेदपोश असुर थे, जिन्हें इस विश्वास ke साथ जनता ने अपने हर वोट ·े साथ सत्ता पर बैठाया था ·ि वह हमारा भला ·रेंगे, ले·िन इस भले ·रने ·ी आड़ में संसद ·े ·ेन्द्र से हो रहे मंथन ने ·ितनी ही तिजोरियों ·ो मालामाल ·िया होगा इस·ी बानगी हम देख ही चु·े हैं। बड़ा और मौजूं सवाल यह है ·ि क्या विश्व ·े सबसे बड़े लो·तंत्र ·ा दंभ भरने वाले हमारे देश में राजनीति ·ी धारा ·ेवल पैसा ·माने ·ा जरिया बन गई है या फिर तमाम नैति·ताओं, देशप्रेम और ए· खुशहाल देश ·े सपने ·ो ता· पर रख दिया गया है। क्या पांच साल में ए· बार ·िसी मुद्दे पर विश्वासमत होना ·रोड़ों ·े वारे-न्यारे ·र देने वाला खतरना· खेल है? मंगलवार ·ो संसद में नेताओं ·े चेहरे ·ुछ ऐसी ही रवानी वाले थे...उनमें आसुरी प्रवृत्ति नजर आ रही थी...उनमें अमृत सत्ता पाने ·ी होड़ थी ...·िसी भी ·ीमत पर, बोलियां लगाई गईं, लोग तोड़े गए...सबसे बड़ी बात तो यह ·ि पर्दा उठा भी...पर ऐसे ·ितने परदे हैं...क्या हर परदे ·े पीछे ·ी ·हानी साफ हो पाई? ·हना मुश्·िल है, ले·िन लो·तंत्र ·े इस मंदिर ने आम लोगों ·े दिलों, जज्बात और ए· बेहतर और खुशहाल सपने ·ो जरूर तोड़ दिया है। संसद, ए· पूर्व नियोजित रंगमंच ही साबित हुआ जहां सारे ·ला·ारों ने अपनी भूमि·ा बखूबी अंजाम थी... स्·्रिप्ट तो पहले ही लिखी जा चु·ी थी?
नर्मदापुरम (होशंगाबाद) जिले के गांव हिरनखेड़ा में जन्म, जहां राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी ने गुरूकुल और स्वतंत्रता संग्राम की गुप्त गतिविधियों के केन्द्र ‘सेवा सदन’ की स्थापना की थी। स्कूल शिक्षा से ही संपादक के नाम पत्रलेखन से पत्रकारिता, लेखन और साहित्यिक, सामाजिक गतिविधियों में झुकाव।
1999 में गांव से ही साइक्लोस्टाइल त्रैमासिक बाल पत्रिका बालप्रयास शुरू की, चार साल तक इसका संपादन किया। शैक्षणिक संस्था ‘एकलव्य’ के साथ जुड़कर बालगतिविधि केन्द्र बालसमूह का 1996 से 2002 तक संचालन किया। ‘ग्राम सेवा समिति’ के साथ जुड़ाव व लेखन कार्यशालाओं में सक्रिय भागीदारी से सामाजिक मुद्दों पर लिखना सीखा। अपने आसपास के मुद्दों पर पत्रलेखन के माध्यम से मुहिम चलाई, इससे कई मुद्दों को हल भी किया गया। युवा पत्र लेखक मंच के सिवनी मालवा ब्लॉक अध्यक्ष का दायित्व निभाया।
2002 में पत्रकारिता में औपचारिक पढ़ाई के लिए माखनलाल राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि में दाखिला लिया, प्रथम श्रेणी में डिग्री हासिल की। 2004 से 2009 तक देशबंधु, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर व राजस्थान पत्रिका भोपाल में रिपोर्टिंग और डेस्क की जिम्मेदारी संभाली।
2012 से 2015 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम के छत्तीसगढ़ हायपर लोकल का लांच किया और तीन साल तक स्टेट हेड के रूप में काम किया। 2016 से 2019 तक एनडीटीवी में बतौर राइटर लेखन, जी न्यूज में 2019 से 2020 तक और 2020 से 2024 तक नेटवर्क 18 में बतौर राइटर लेखन किया।
वर्ष 2020 से देश की ख्यात पर्यावरण पत्रिका ‘डाउन टू अर्थ’ में कृषि, पर्यावरण, स्वास्थ्य, जनसरोकार के विषयों पर मध्यप्रदेश से ग्राउंड—रिसर्च बेस्ड स्टोरीज पर काम जारी।
समानांतर रूप से सामाजिक शोध संस्था ‘विकास संवाद’ के साथ जनसरोकार के मुद्दों पर जमीनी काम कर रहे हैं। जनसरोकारी पत्रकारिता के लिए सक्रिय रूप से संवाद कार्यक्रमों का समन्वय। अब तक 12 नेशनल मीडिया कान्क्लेव का सफल संयोजन। सामाजिक विषयों पर दस किताबों का संपादन। लेखन, सोशल मीडिया, डिजाइनिंग और फोटोग्राफी पर प्रशिक्षक की भूमिका का निर्वाह।
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कुछ प्रतिष्ठित फैलोशिप और अवार्ड
2020 - सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज फैलोशिप फॉर एफॉर्डेबल हाउसिंग, नई दिल्ली
2019- नेशनल वाटरएड फैलोशिप, नई दिल्ली
2019— गांधीयन ईको फिलॉसफी फैलोशिप, एप्को, मप्र
2017— रीच लिली टीबी मीडिया नेशनल अवार्ड, नई दिल्ली
2015— नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया का नेशनल अवार्ड
2014— एक्सीलेंस रिपोर्टिंग आन इम्युनाइजेशन अवार्ड, यूनीसेफ, नई दिल्ली
2011— रीच लिली टीबी मीडिया फैलोशिप, चैन्नई
2007— विकास संवाद मीडिया फैलोशिप के लिए भी चुना गया।
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