अप्रैल का महीना शुरू हो गया था और हमें कल राजपुर जाना था। इसके पहले शेखर जी को फोन लगाया तो वह सान्या ने उठाया। सान्या ने बताया कि पापा और मम्मी अभी मनाली जाने की तैयारी कर रहे हैं। पहले वहां जिस टूर आपरेटर से बात हुई थी वह फोन पिक नहीं कर रहा है और उसने अभी तक ठहरने के लिए होटल भी बुक नहीं की है। हम समझ गए कि कल के दिन कुछ अलग ही कहानी मिलने वाली है। सान्या को हमने बता दिया कि कल आ रहे हैं, पापा को बता देना।
उनकी बात तकरीबन ठीक थी। हमने कहा— चलिये विमल जी के घर चलते हैं। वे भी तो कहीं घूमने जाने की बात कर रहे थे। उन्होंने तैयारी कर ली है क्या!
शेखर जी: भई विमल जी की बात अलग है। वे हर काम इंटरनेट से कर लेते हैं।
तो आप भी कर लीजिए।
सच कहूं तो करना तो चाहता हूं लेकिन कई बार आनलाइन फ्राड की खबरों को सुनकर सहम जाता हूं।
यह बात तो है, लेकिन आनलाइन फ्राड उनके साथ ही होता है, जो सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखते हैं।
शेखर जी: यह तो है। चलिये विमल जी के यहां चलते हैं।
हम सभी विमल जी के घर पहुंचे तो सबसे पहले उनसे फैमिली के टूर के बारे में ही पूछा।
विमल जी बोले— इस बार तो तैयारी की सारी जिम्मेदारी तन्मय ने ले रखी है। उसने टिकट बुक करवा लिये हैं। होटल भी बुक हो गया है। स्टेशन पर होटल की ही कार आ जाएगी और वे ही पिक कर लेंगे। फिर इंटरनेट पर सर्च करके पहले से ही जहां जहां घूमना है, उसका शेड्यूल भी बना लिया है। शाम को होटल पहुंचेंगे और दूसरे दिन सुबह नाश्ते के बाद घूमने निकलेंगे। शाम तक तीन जगह घूमने का प्लान है। मैप पर दूरियों के मुताबिक हर रोज रोज की प्लानिंग की है। बीच में लंच के लिए भी बेहतर होटल रेटिंग और कस्टमर रिव्यू के मुताबिक तय किए हैं।
शेखर जी: यानी आने जाने के टिकट, होटल, घूमने की जगह से लेकर खाने तक सब कुछ आनलाइन ही प्लान किया है क्या।
विमल जी: हां भई। जब सारी चीजें उपलब्ध हैं, तो उनका फायदा तो उठाना चाहिए।
शेखर जी: बात तो सही है, लेकिन अभी मैं वही कह रहा था कि आनलाइन फ्राड की इतनी सारी घटनाएं होती हैं। बताते हैं कि साइबर क्राइम की इंडस्ट्री 1.5 ट्रिलियन डॉलर की है। यह कई देशों की कुल जीडीपी से भी ज्यादा है।
विमल जी: शेखर जी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। आनलाइन दुनिया में खतरे तो बहुत हैं। लेकिन खतरे तो हमारी जमीनी दुनिया में भी हैं, तो क्या हम सुविधाओं का लाभ लेना बंद देते हैं।
शेखर जी: लेकिन जिस दुनिया को जानते नहीं हैं, उसमें घुसना तो काफी खतरनाक है।
विमल जी: यह बात भी ठीक है। लेकिन आप जानते ही हैं कि अब आने वाले दौर में इंटरनेट और डिजिटल चीजें बढ़ेंगी ही, तो फिर इनके इस्तेमाल की पद्धतियां सीखना जरूरी है और इनकी सुरक्षा को भी जानना होगा।
शेखर जी: अब अपनी उम्र तो गुजर गई है। कुछ दिन और इसी तरह गुजर जाएंगे।
विमल जी: जो उम्र बची है, उसे भी सीखने में लगाने में कोई हर्ज तो नहीं है। और फिर इसके फायदे ही ज्यादा है, नुकसान तो नहीं हैं न।
शेखर जी: हां, बात तो सही है। तो चलिये पहले आप मनाली के लिए कोई अच्छा सा होटल बुक करवा दीजिए और रेल टिकट भी बुक करना है।
विमल जी: लाइये अपना मोबाइल अभी हम ही आपके टिकट एजेंट बन जाते हैं।
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Content by: Sachin Srivastava
Illustration : Pooja Malviya
इस सीरीज की सातवी कहानी पढ़िए कल...
(नोट: इन कहानियों की किताब विकास संवाद ने प्रकाशित की है। यदि आपको यह उपयोगी लगे तो कॉपी प्राप्त करने के लिए हमें लिख सकते हैं। )
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