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गोलखेड़ी का लाखों कमाने वाला किसान जब गया हौलेंड

बैरसिया सड़क पर गोलखेड़ी के पास एक खेत आपका ध्यान बरबस ही खींच लेता है। इस खेत में सफेद—सफेद आकार के विशाल तंबू खड़े हैं। लोहे के गेट पर अगल-बगल में लगे लैंपपोस्ट, और रास्ते के दोनों और सजावट वाले पौधों को करीने से काटा गया है। इसके नीचे रंग—बिरंगी ईंटों की क्‍यारि‍यां बनी हुई हैं। किसी मैरिज गार्डन सरीखे सजाए गए इस रास्ते से जब आप एक बड़े से घर में पहुंचते हैं तो यहां आपको तरह—तरह की खेती में काम आने वाली मशीनरी दिखाई देती है। फार्महाउसनुमा घर के आंगन में बजाज पल्सर मोटर साइकिल खड़ी है, एक शेड में सफेद रंग की कार भी मौजूद हैं। यहां पर हॉलैंड टैक्टर से जुताई की तैयारी में जुटे दिखाई देते हैं श्याम कुशवाहा। जब उनके बारे में और लोगों से सुना तो लग रहा था कि कोई पकी उम्र का अनुभवी किसान होगा, लेकिन जब उन्‍होंने अपना परिचय ​दिया तो लगा अरे वाह, कम उम्र में इतना अनुभव, नाम और बेहतर काम, जिसकी चर्चा दूसरे लोग भी कर रहे हैं।

देखा जाए तो गोलखेड़ी की यूं तो कोई खास बात नहीं है, पर अब उसे खास बना दिया है श्याम सिंह कुशवाहा के काम ने। काम भी ऐसा, जिसे आज के दौर में पढ़े—लिखे लोग कम अपना रहे हैं। श्याम कुशवाहा ने भोपाल से स्नातक की पढ़ाई की, लेकिन उनका लक्ष्य खेती—किसानी को ही उन्नत तकनीक और आधुनि‍कतम प्रयोग के जरि‍ए करना था। श्याम कहते हैं ‘काम वह ही करना चाहिए जिसमें मजा आए। मजे वाले काम में ही मन लगता है। मुझे खेती में ही मजा आता है, इसलिए इस काम में न तो कभी निराशा होती है, न कभी थकान होती है।‘

सही भी है कोई भी काम लगन से किया जाए तो उसमें सफलता मिलती ही है, हां उसके लिए लीक से हटकर चलना पड़ता है, और थोड़ा—बहुत जोखिम भी लेना पड़ता है, लेकिन परिवार का साथ हो, और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरुकता हो, तो यह संभव है। यही कारण है कि 12 एकड़ के उनके कृषि फार्म में विविधता भरी फसलें दिखाई देती हैं, वह भी जैविक आधारित। इतना ही नहीं सरकार की पॉली हाउस लगाने से लेकर फलों की खेती करने तक का उन्‍होंने भरपूर लाभ उठाया है।

इसकी शुरुआत श्याम ने अमरूद के बागान से की। अपने खेत के एक हिस्से में उन्होंने गेहूं—सोयाबीन की जगह अमरूद की फसल ली। अमरूद में खासा फायदा हुआ तो दूसरी सब्जियों की तरफ रुख किया। जैविक खेती आधारित व्यवस्था से वह लगातार अच्छा उत्पादन प्राप्त करते गए, लेकिन उनके फार्म हाउस को असली पहचान तब मिली जब उन्होंने 44 हजार स्क्वेयर फिट यानी लगभग एक एकड़ के एरिया में तीन पॉली हाउस लगवाए। इसके लिए तकरीबन 38 हजार रुपए का खर्च आता है, इसमें से उनके पंद्रह लाख रुपए की पूंजी अपनी कमाई से लगी, बाकी का खर्च सरकार की विभिन्न योजना के अंतर्गत सब्सिडी में मिल गया। पॉली हाउस लगाने के बाद तो जैसे उनका उत्साह दोगुना हो गया। अकेले पालक की फसल लगाकर उन्होंने एक लाख रुपए की आय प्राप्त की। पॉली हाउस का यह फायदा है कि उसमें किसी भी तरह के मौसम की अति से बचाव हो जाता है। पॉली हाउस में लगी फसल ज्यादा गर्मी, ज्यादा सर्दी या पाला पड़ने से बची रहती है। साथ ही कीड़े—मकोड़े और दूसरे हमलों से भी फसल खुले वातावरण की तुलना में बची रहती है। इससे बेहतर उत्पादन मिलता है। पॉली हाउस लगाने के बाद वह सब्जियों की फसल को बहुत बेहतर तरीके से ले पाए हैं।

श्याम को उसकी इस उप​लब्धि पर कई जगह से प्रोत्साहन मिलता है, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि उन्हें तब प्राप्त हुई, जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि कर्मण अवार्ड उनके साथ साझा किया। लगातार चौथे साल जब मध्यप्रदेश को यह अवार्ड मिला तो उन्होंने अपने आवास पर किसानों को बुलाया और इस खुशी में शामिल किया। श्याम जब मुख्यमंत्री से मिले तो उन्हें अपने काम पर और भरोसा हो गया, उनका उत्साह दोगुना हो गया।

जैविक खेती पर है भरोसा: 

श्याम एक ओर नयी तकनीक को अपना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उन्होंने जैविक खेती को भी अपनाया है। नयी तकनीक में जहां उनके पास 25 लाख की मशीने हैं जिसमें निंदाई—गुड़ाई, बीज की ग्रेडिंग करने से लेकर भूसा बनाने तक की मशीनें हैं, वहीं जैविक खेती के लिए वह अपने ही फार्म में उपलब्ध संसाधनों से 25 तरह की दवाईयां भी तैयार करते हैं। जैविक खाद और जैविक दवाओं से उनके खेत की फसल में अलग ही चमक आती है। यह सब सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए वह गाय, भैंस और बैल भी पालते हैं। पिछले दस सालों में उनका यह कुनबा तीन गायों से बढ़कर अब 55 तक हो गया है। इससे उनका डेयरी का व्यापार भी बढ़ा है, और अतिरिक्त कमाई भी हुई है। 

हॉलैंड जाने का मौका: 

श्याम अब हॉलैंड में जाकर अपनी खेती का डंका बजाएंगे। उनका चयन सरकार की एक योजना के तहत हुआ है जिसके अंतर्गत किसान विदेश में जाकर वहां हो रही उन्नत खेती को सीखते—सिखाते हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि कर्मण अवार्ड मिलने के बाद इस योजना की घोषणा की थी। इसके लिए सरकार अपने राज्य बजट में अलग से प्रावधान करती है। श्याम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रशासन को बधाई देते हैं कि उनके लक्ष्य को प्राप्त करने में सरकार उन्हें हर तरह से मदद कर रही है, और इसी कारण वह आज एक सफल कृषक के रूप में जाने जाते हैं। वह कहते हैं कि मुख्यमंत्री खुद एक कृषक परिवार से हैं, इसलिए वह किसानों के लिए बेहतर काम कर रहे हैं। उन्हें अच्छा लगता है कि एक युवा किसान होते हुए भी वरिष्ठ कृषक लोग उनसे सलाह लेने के लिए      आते हैं।

श्याम सिंह कुशवाहा के काम से अब गांव के अन्य लोग भी प्रेरणा ले रहे हैं। बीनापुर गांव के राजेश मीणा पिछले पन्द्रह साल से गेंदे के फूल की खेती कर रहे हैं, तीन हजार की आबादी वाले बीनापुर गांव में पचास प्रतिशत लोग गेंदे की फूल की खेती करते हैं, क्योंकि यह दूसरी फसलों की तुलना में ज्यादा फायदा देकर जाती है, राजेश ने बताया कि श्याम सिंह से प्रेरित होकर हमने पिछले दो सालों से गेंदे की खेती जैविक तरीके से करना शुरू किया है, इससे हमारी लागत में कमी आई है, इस साल उन्हें एक फसल पर लगभग 25 हजार रूपये का फायदा हुआ है.

इसी तरह भैंरोपुरा गांव के जीतेन्द्र सिंह ने पिछले साल उद्यानिकी विभाग की मदद से पपीते के एक हजार पौधे लगाये थे, नदी किनारे खेत होने की वजह से पपीते के पेड़ बाढ़ के वक्त पानी में डूबे रहे इससे उनके 90 प्रतिशत पौधे खराब हो गए, अब वह नए सिरे से दोबारा बगीचा लगाने की योजना बना रहे हैं.

राकेश कुमार मालवीय

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