राजपुर में हमारा यह दौरा काफी दिन बाद लगा था। हमने इस बार महसूस किया कि शेखर जी का परिवार भी आनलाइन सुविधाओं का फायदा उठाने के मामले में अब काफी आगे बढ़ चुका है। जब हम गांव की विभिन्न गलियों से गुजरते हुए शेखर जी के घर पहुंचे तो वे गाय के एक लोन के लिए अपने लैपटॉप पर कुछ फार्म भर रहे थे। हमने पूछा कि शेखर जी आप तो आनलाइन सुविधाओं के मामले में काफी आलोचनात्मक रवैया रखते थे। अब क्या हुआ।
वे हंस पड़े।
बोले— समय के साथ चलना है तो खुद को बदलना ही पड़ेगा।
हमने पूछा— क्या कर रहे हैं, इतने तल्लीन होकर!
शेखर जी: घर के पीछे के हिस्से में खाली जमीन पड़ी है और दो भैंस और एक गाय खरीदने का सोच रहे हैं। इसके लिए लोन की प्रक्रिया देख रहा था।
यह तो बड़ी अच्छी बात है।
हां, सरकार की योजनाएं भी काफी हैं। एक बार यह जानकारी ले लें तो गांव में काफी लोगों के लिए यह योजनाएं मददगार होंगी।
जी, हमने पिछली बार इस बारे में बात की थी। पंचायत में इसके लिए अलग से व्यवस्था की बात हुई थी, उसका क्या हुआ।
शेखर जी: पंचायत से प्रस्ताव हो गया है, बस फंड का इंतजार है।
जब तक फंड नहीं आता है, तब तक गांव के कुछ युवाओं के जरिये भी तो यह किया जा सकता है।
हां, सोच रहे हैं यही बात लेकिन सभी की सहमति भी जरूरी है।
बिल्कुल। वैसे आप मोबाइल पर भी यह जानकारी देख सकते हैं, तो लैपटाप पर क्यों देख रहे हैं।
शेखर जी: मोबाइल पर पूरे फंक्शन नहीं खुलते हैं और सरकार की कई साइट्स मोबाइल के हिसाब से बनी भी नहीं हैं तो इन्हें लैपटाप या डेस्कटॉप पर ही देखना होता है। तभी पूरी जानकारी सही ढंग से मिल पाती है।
तो जो साइट आप देख रहे हैं क्या वह सही साइट है। इसकी जानकारी कैसे लेते हैं।
शेखर जी: मेरे लिए भी यह नई बात थी। मैंने पहले एक साइट खोली लेकिन मुझे उसमें कुछ गड़बड़ लगी। तो मैंने विमल जी से मदद ली। उन्होंने बताया कि हर सरकारी विभाग की साइट का पूरा डोमेन नाम और यूआरएल पता होने के बाद ही उसे सीधे खोलना चाहिए।
तो क्या जो लोग साइट के संभावित नाम से जो भी पता हो, उसके जरिये सर्च करके साइट खोलते हैं वह गलत है।
बिल्कुल। यह सुरक्षित तरीका नहीं है। जब तक आपको साइट का सही पता मालूम न हो, ऐसी किसी भी साइट की जानकारी को ठीक नहीं मानना चाहिए। और फिर आजकल सरकारी विभागों, बैंकों व अन्य संस्थानों की नकली साइट भी बहुत ज्यादा बनने लगी हैं। इनसे भी बचना चाहिए।
वाह शेखर जी आप तो अब आनलाइन जानकारी में पारंगत होते जा रहे हैं।
इतने में विमल जी भी आते हुए दिखाई दिए
तो शेखर जी बोले— होना ही पड़ेगा। पडोसी विमल जी जैसा हो तो सुरक्षित इंटरनेट अपनाने में हर्ज भी नहीं है।
विमल जी: जी सुरक्षित इंटरनेट जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही हमें अपना पारंपरिक ज्ञान भी नहीं छोड़ना चाहिए। नई तकनीक के साथ पुराने ज्ञान को बचाए रखने और उसे लगतार इस्तेमाल में लाकर ही हम जीवन को आसान बना सकते हैं।
विमल जी की इस बात से असहमत कैसे हुआ जा सकता है। उनकी बात पर सभी ने हामी भरी और हम गांव के अन्य हिस्सों में जाने के लिए उठ खड़े हुए।
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Content by: Sachin Srivastava
Illustration : Pooja Malviya
इस सीरीज की 9 कहानी पढ़िए कल...
( नोट: इन कहानियों की किताब विकास संवाद ने प्रकाशित की है। यदि आपको यह उपयोगी लगे तो कॉपी प्राप्त करने के लिए हमें लिख सकते हैं। )
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