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पांचवां दिन: सरकारी योजनाओं की सूचना

 


करीब 15 दिन बाद हम फिर गांव पहुंचे तो बस स्टैंड के करीब ही चौपाल पर कुछ ग्रामीणों से बातचीत हुई। वहां सभी किसी के पैसों के बारे में बात कर रहे थे। पता चला कि गांव के एक किसान ललित जी के बैंक खाते में करीब 90 हजार रुपए आए हैं, लेकिन उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं है कि यह पैसा कहां से आया। बस इसी की चर्चा हो रही थी और जितने मुंह उतनी बातें। कोई कह रहा था कि सरकार सबके खातों में पैसा डाल रही है, तो कोई इसे गलती से किसी और के पैसे को अपने खाते में आने से जोड़ रहा था।

ललित जी से इस बारे में पूछा कि क्या उनके पास कहीं से पैसे आने थे तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। इस बीच शेखर जी और विमल जी भी इस गहमागहमी में शामिल हो गए।

विमल जी को इस बारे में पता चला तो उन्होंने कहा कि अरे ललित जी आपने पीएम आवास योजना के तहत आवेदन दिया था। यह पैसा उसका तो नहीं आया है।

इस बात से ललित जी एकदम सोच में पड़ गए फिर चहकते हुए बोलेहां हो तो सकता है। लेकिन जब बैंक खुलेगा तो वहीं से इसकी सीधी जानकारी मिलेगी।

शेखर जी बोलेइन दिनों सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थी के खातों में रहा है तो इस तरह की आशंकाएं और असहजताएं आम बात हैं।

हां लेकिन इससे बचा कैसे जाए। किसी ने सवाल किया।

विमल जी ने इसका जवाब दिया। देखिये पैसे के लेनदेन की सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका तो जानकारी ही है। हालांकि आप जिस योजना के लाभार्थी हैं, उससे जुड़ी अपनी निजी जानकारी को भी हर किसी से शेयर नहीं करना चाहिए।

योजना की जानकारी मिलना ही बहुत मुश्किल होता है। एक बुजुर्ग किसान ने कहा।

विमल जी: काका, आजकल ज्यादातर योजनाओं की जानकारी तो सरकारी वेबसाइट और पोर्टल पर उपलब्ध है ही। इन साइट्स पर योजनाओं से संबंधित जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर भी दिए गए हैं। इन नंबरों के जरिये जानकारी ली जा सकती है।

बुजुर्ग:सुना तो हमने भी है कि मोबाइल पर ही सारी जानकारी मिल जाती है, लेकिन अब इस उम्र में हम कहांकहां नंबर लगाएं, लड़कों को कुछ बोलो तो वे दिन भर जाने किस किस से बातें करते रहते हैं, लेकिन काम की कोई बात पता नहीं करते हैं।

शेखर जी:लेकिन अपनी पंचायत में भी तो यह व्यवस्था की गई थी कि हर किसी को योजना की जानकारी वहां से मिल जाएगी।

बुजुर्ग:अरे भई शेखर कैसी बातें करते हो। एक आध हफ्ते तक ठीक रहा। फिर कभी इंटरनेट ठीक नहीं है, तो कभी कंप्यूटर सही नहीं चल रहा है, ऐसा बताते हैं। हमने तो खाद और बीज मंगवाने के लिए कहा था, लेकिन आज तक पता नहीं चला।

विमल जी:यह बात तो सही कही आपने। लेकिन अब ऐसा करते हैं कि हम लोग पंचायत में इसकी व्यवस्था करते हैं। वहां इंटरनेट के जरिये योजनाओं की जानकारी सबको किसी भी समय मिल सके, इसके लिए व्यवस्था की जाए। साथ ही इसके लिए जरूरी उपकरण भी चाक चौबंद रहें यह समय समय पर हम सभी मिलकर देखते रहेंगे।

शेखर जी:हां यह ठीक रहेगा।

विमल जी:गांव के चारपांच लड़कों को यह जिम्मेदारी दे देंगे कि वे बारीबारी से एकएक दिन पंचायत भवन में बैठा करें और पंचायत के कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से जरूरी जानकारी सबको मुहैया कराएं।

शेखर जी: अगर कोई गड़बड़ होगी तो उसे तुरंत सुधारने की व्यवस्था भी हो।

 सभी ग्रामीणों ने एकमत से इस प्रस्ताव का स्वागत किया और तय किया गया कि पंचायत की अगली बैठक में इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाया जाएगा।

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Content by: Sachin Srivastava 

Illustration : Pooja Malviya 

इस सीरीज की छठवी कहानी पढ़िए कल... 

( नोट: इन कहानियों की किताब विकास संवाद ने प्रकाशित की है। यदि आपको यह उपयोगी लगे तो कॉपी प्राप्त करने के लिए हमें लिख सकते हैं। ) 

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