सोमवार, दिसंबर 10, 2012

आप यकीन करेंगे यहां डेढ़ लाख लोगों का इलाज करता है एक डॉक्टर !

रायपुर-मैनपुर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के अंतर्गत आदिवासी ब्लाक मैनपुर में स्वास्थ्य सुविधा का हाल-बेहाल है। यहां डेढ़ लाख लोगों के लिए एकमात्र सामुदायिक केंद्र में मात्र एक डाक्टर है। 50 उपस्वास्थ्य केंद्र में से 30 में ताले इसलिए लगे हैं। इलाज समय पर नहीं मिलने से अकाल मरने वालों की संख्या हर साल बढ़ जाती है।


मैनपुर ब्लाक में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है, इसके अंतर्गत 70 ग्राम पंचायत के 170 गांव के 1.56 लाख लोग निर्भर हैं। यहां के लिए आठ डाक्टर के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में एक ही डाक्टर हैं यानी एक लाख से अधिक लोगों के लिए एक ही डाक्टर है, सात पद रिक्त हैं।


एक ही डाक्टर होने के कारण यदि डाक्टर किसी काम से बाहर जाते हैं तो गांवों से आए मरीजों को कोई देखनेवाला नहीं रहता है। ऐसे में कोई बड़ी घटना हो जाए तो क्या होगा सोचा जा सकता है। पोस्टमार्टम के लिए भी लोगों को परेशानी होती है।


अस्पताल पुराने भवन में संचालित हो रहा है। बारिश के दिनों में यह हाल रहता है कि जगह-जगह पानी टपकता रहता है, दवा आदि सामान खराब हो जाता है। कहने को तीस बिस्तर अस्पताल है, लेकिन गिनती के ही बिस्तर नजर आते हैं, उसके भी गद्दे चादर फटे रहते हैं।


गांव से इलाज कराने आए मरीजों के परिजनों के इलाज के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि अस्पताल के स्टाफ के पीने के लिए पानी सहित शौचालय व मूत्रालय तक की व्यवस्था नहीं है। इससे मरीजों सहित स्टाफ के लोगों को असुविधा होती है।


अस्पताल में छह साल पहले एक एंबुलेंस वाहन दिया गया है, लेकिन चालक नहीं होने के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिलता है। कई बार ग्रामीणों ने विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री से यहां के अस्पताल में महिला डाक्टर नियुक्ति की मांग की है, लेकिन अब तक महिला डाक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। इससे महिलाओं को परेशानी होती है।


यह क्षेत्र घने जंगल में बसा है, इसलिए लोग साल भर मलेरिया, उल्टी-दस्त आदि बीमारियों से पीडि़त रहते हैं, कई बार समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण उनकी अकाल मौत हो जाती है। छग को राज्य बने 13 साल हो गए हैं लेकिन अब क्षेत्र में समुचित इलाज की सुविधा नहीं मिलने के कारण लोगों को इलाज के लिए ओडिशा के धरमगढ़, भवानीपटना जाना पड़ता है।

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http://www.bhaskar.com/article/c-16-491217-NOR.html

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