शुक्रवार, जुलाई 04, 2008

आहट

हाँ कुछ आहट सुनी है मैंने
हाँ कि सांसे सुनी हैं मैंने
गरम अंगारों सी दहकती हुई
पत्थरों के बीच
लगातार पार्श्व से उठते शोरगुल से
परेशां सी हैरान सी
एक अनजाने डर के बीच शहर में बियावान सी
टूटते होसले सी
चटकते विश्वास सी
उत्पाती लोगों सी
धरम के नाम सी...

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