बुधवार, मई 27, 2015

झीरम घाटी नक्सली हमलाः कत्ल की वो रात (दूसरी किश्त)


राकेश कुमार मालवीय

पांच-छह तस्वीरें आ गई थीं। घायलों की, मृतकों की। पता चल रहा था कि महेन्द्र कर्मा नक्सलियों के सबसे बड़े टारगेट पर थे। केवल प्रादेशिक चैनलों पर ही नहीं नेषनल चैनलों पर भी केवल यही खबर थी। दिल्ली हिल चुकी
थी। भाजपा की सरकार वाले राज्य में हमला कांग्रेस के काफिले पर था तो तीखी प्रतिक्रिया स्वाभाविक ही थी। मुख्यमंत्री ने आपात बैठक बुला ली थी।

दिल्ली में भी प्रधानमंत्री आवास पर बैठक शुरू हो गई थी। सभा में शामिल अजीत जोगी राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को स्थिति से अवगत करा चुके थे। रात को लगभग तीन बजे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी विषेष विमान से रायपुर पहुँच चुके थे। इधर घायलों को इलाज के लिए जगदलपुर के अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था। देर रात तक सूचनाओं को पकाया जा रहा था। हमले में कवासी लखमा एकमात्र चष्मदीद थे जिन्हें नक्सलियों ने छोड़ दिया था। कवासी लखमा को अजीत जोगी का करीबी माना जाता है। लोगों को इस बात पर अचरज था कि कवासी लखमा को नक्सलियों ने क्यों छोड़ दिया।

रात को ही टीमें घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गई थीं। हमारे राज्य संपादक ने अपनी यात्रा बीच में ही छोड़कर नागपुर से वापसी की रेल पकड़ ली। मझे सुबह से फिर खबरों के मोर्चे पर भिड़ना था, इसलिए मैंने थोड़ी देर आराम करने के लिए घर जाना तय किया। अपनी गाड़ी लेकर मैं जीई रोड के रास्ते अपने घर शंकर नगर की ओर था। एक अजीब सा सन्नाटा था सड़क पर। देर रात जो लोग सड़क पर थे, उनके चेहरों पर जो भाव थे, ऐसे सामान्यतः नहीं दिखाई देते। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के आक्रोश  और गुस्से की खबरें पहले ही आ गई थीं, ऐसे में घटना की प्रतिक्रिया में कई तरह की आशंकाएं भी शहर में मंडरा रही थीं। शास्त्री चौक, राजभवन, भारत माता चौक उससे आगे शंकर नगर रोड पर सारे मंत्रियों के घरों के सामने पुलिस तैनात हो चुकी थी। रायपुर
में बिजली कटौती नहीं होती, जब घर पहुंचा तो लाइट नहीं थी।

सुबह सारे अखबार खौफनाक तस्वीरों से रंगे हुए थे। महेन्द्र कर्मा की मौत हो चुकी थी। विद्याचरण शुक्ल गंभीर रूप से घायल थे। उन्हें रातोंरात गुडगांव के लिए रेफर किया जा चुका था। केवल पता नहीं चल रहा था तो नंदकुमार पटेल का। नक्सलियों ने उन्हें अगवा तो किया, लेकिन जंगल के अंदर ले जाकर उनके साथ क्या किया इस बात की कोई खबर नहीं थी। सुबह से फिर खबरिया चैनलों के पास दिखाने को बहुत कुछ था। घटनास्थल के वीडियो फुटेज से उस खौफनाक वारदात का अंदाजा लगाया जा सकता था। दस बजे तक हमारे पास भी एक्सक्लूसिव तस्वीरें घटनास्थल से आ चुकी थीं। 

नंदकुमार पटेल और उनके बेटे की मौत की खबर भी पहुंची। इधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया
गांधी भी रायपुर के लिए निकल चुके थे। प्रदेष कांग्रेस कमेटी कार्यालय में एक शोकसभा का आयोजन किया गया। इंटरनेश्नल मीडिया में यह खबर जगह बना चुकी थी।  नक्सलियों की इस घटना को कायराना करतूत करार दिया जा रहा था। हमारी साइट पर इन तस्वीरों को लोग भारी संख्या में देख रहे थे। पेजव्यूज
बढ़ते ही जा रहे थे। क्रमशः .....

लेखक स्वतंत्र पत्रकार और नेशनल फौन्डेशन फोर इंडिया के फेलो हैं

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